वाराणसी में सपा की बढ़त से भाजपा की मुश्किलें बढ़ीं, केदारनाथ सिंह ने चुनावी हार स्वीकारी

उपशीर्षक: स्नातक एमएलसी सीट पर आशुतोष सिन्हा को पहली वरीयता के मतों में 16,984 वोटों की बढ़त, दूसरी वरीयता की गिनती से तय होना था अंतिम परिणाम

वाराणसी। उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव में वाराणसी खंड स्नातक सीट का मुकाबला भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। भाजपा प्रत्याशी केदारनाथ सिंह ने मतगणना के बीच ही अपनी हार स्वीकार करते हुए समर्थकों और मतदाताओं का धन्यवाद किया। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार आशुतोष सिन्हा ने पहली वरीयता के मतों की गिनती में बड़ी बढ़त हासिल की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में इस घटनाक्रम ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।

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सपा प्रत्याशी को मिले 50 हजार से अधिक वोट

29 अक्टूबर की सुबह तक सामने आए आंकड़ों के अनुसार, नौवें चक्र की मतगणना के बाद आशुतोष सिन्हा को 50,462 मत मिले थे। वहीं, भाजपा के केदारनाथ सिंह को 33,478 वोट प्राप्त हुए। दोनों उम्मीदवारों के बीच मतों का अंतर 16,984 रहा। हालांकि, पहली वरीयता के मतों से जीत के लिए जरूरी कोटा पूरा नहीं होने के कारण परिणाम की प्रक्रिया आगे बढ़ी। अंतिम नतीजे के लिए दूसरी वरीयता के मतों की गिनती की जा रही थी।

सोशल मीडिया संदेश में स्वीकार किया जनादेश

केदारनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर संदेश साझा कर चुनाव में साथ देने वाले मतदाताओं, पार्टी कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं के प्रति आभार जताया। उन्होंने जनादेश को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए स्वीकार करने की बात कही। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव का परिणाम उनके जनसेवा के संकल्प को प्रभावित नहीं करेगा। उनके इस संदेश के बाद वाराणसी स्नातक सीट पर भाजपा की हार की चर्चा तेज हो गई।

शिक्षक सीट पर भी भाजपा को नहीं मिली सफलता

वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भी समाजवादी पार्टी के लाल बिहारी यादव ने जीत दर्ज की थी। ऐसे में स्नातक सीट पर आशुतोष सिन्हा की बढ़त ने भाजपा के सामने स्थानीय स्तर पर राजनीतिक चुनौती बढ़ा दी। एमएलसी चुनाव के परिणामों को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की तैयारियों के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, इन चुनावों के नतीजे विधानसभा चुनाव के संभावित परिणामों का सीधा संकेत नहीं माने जा सकते।

मतगणना की प्रक्रिया को लेकर भी हुआ विवाद

वाराणसी खंड स्नातक सीट पर 27 अक्टूबर से मतगणना चल रही थी। इस दौरान भाजपा पक्ष की ओर से गिनती की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए और दोबारा मतगणना की मांग किए जाने की खबरें सामने आईं। इससे नतीजे घोषित होने में देरी हुई। स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में वरीयता आधारित मतगणना होती है। पहली पसंद के मतों से निर्धारित कोटा हासिल नहीं होने पर नियमों के मुताबिक दूसरी वरीयता के मतों की गणना की जाती है। इसी प्रक्रिया के पूरा होने के बाद अंतिम परिणाम स्पष्ट होना था।

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