गैस सिलेंडर का झंझट खत्म! देहरादून-मसूरी रोड के ढाबों पर छाई ‘इलेक्ट्रिक हॉट प्लेट’, जानें क्यों बढ़ी डिमांड

देहरादून : उत्तराखंड की हसीन वादियों में घूमने आने वाले पर्यटकों की पहली पसंद ‘पहाड़ों वाली मैगी’ अब एक नए अंदाज में पक रही है। देहरादून और मसूरी रोड के मशहूर मैगी पॉइंट्स पर अब गैस सिलेंडरों की किल्लत और बढ़ती कीमतों का तोड़ निकाल लिया गया है। व्यापारियों ने पुराने दौर को याद करते हुए ‘हॉट प्लेट’ और बिजली के हीटरों को अपना हथियार बना लिया है। आलम यह है कि जो काम कभी महंगे कमर्शियल सिलेंडर करते थे, अब वही काम मात्र 50 रुपये की हीटर कॉइल से हो रहा है।

गैस की किल्लत ने बदला काम करने का तरीका

देहरादून के प्रसिद्ध मैगी पॉइंट्स और मसूरी रोड पर इन दिनों कमर्शियल गैस सिलेंडरों की भारी परेशानी चल रही है। व्यापारियों का कहना है कि सिलेंडर समय पर नहीं मिल रहे और कीमतें भी आसमान छू रही हैं। ऐसे में लकड़ियां जलाकर खाना बनाना न केवल मुश्किल है बल्कि पर्यावरण के लिहाज से भी कठिन है। इसी का समाधान व्यापारियों ने ‘इलेक्ट्रिक हॉट प्लेट’ और हीटर के रूप में ढूंढा है।

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पुराने दौर की वापसी : ₹50 की कॉइल का कमाल

व्यापारी संजीव बत्रा बताते हैं कि इन दिनों बाजार में इंडक्शन से ज्यादा ‘हॉट प्लेट’ की डिमांड है। यह दिखने में पुराने जमाने के हीटर जैसी होती है जिसमें बिजली की कॉइल लगी होती है। संजीव कहते हैं, “इन्हें देखकर वह पुराना वक्त याद आता है जब हीटर पर खाना बनता था।” आज के दौर में कई छोटे दुकानदार सिर्फ 50 रुपये वाली हीटर कॉइल लाकर अपना काम चला रहे हैं, जो काफी किफायती साबित हो रहा है।

भारी बर्तनों के लिए ‘हॉट प्लेट’ है वरदान

रेस्टोरेंट और ढाबा मालिकों के लिए ‘हॉट प्लेट’ सबसे बेहतरीन विकल्प साबित हो रही है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी मजबूती है। जहाँ इंडक्शन पर भारी बर्तन रखना मुश्किल होता है, वहीं ये हॉट प्लेट 5 से 6 किलो तक का वजन आसानी से झेल लेती हैं। मैगी, चाय और अन्य फास्ट फूड बनाने के लिए यह कमर्शियल चूल्हे की तरह ही काम करती है।

अब किराए पर भी मिल रहे हैं बिजली के चूल्हे

इस बढ़ती मांग ने व्यापार का एक नया जरिया भी खोल दिया है। मसूरी के कई बड़े व्यापारी अब इन हॉट प्लेट्स को बेचने के साथ-साथ छोटे दुकानदारों को किराए पर भी दे रहे हैं। इससे उन वेंडर्स को बड़ी राहत मिली है जिनके पास एक साथ नया सेटअप लगाने का बजट नहीं है। अब पर्यटकों को उनकी पसंदीदा मैगी के लिए इंतज़ार नहीं करना पड़ता और व्यापारियों को गैस खत्म होने का डर नहीं सताता।

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