धामी कैबिनेट में गढ़वाल का पलड़ा भारी, यही से तय होगा किसकी होगी सरकार!

उत्तराखंड में सालों का इंतजार आखिरकार 20 मार्च को पूरा हो ही गया। धामी सरकार ने शुक्रवार को अपने कैबिनेट का विस्तार कर कुल पांच विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई। 2027 के चुनाव से ठीक पहले हुए इस मंत्रीमंडल विस्तार में क्षेत्रीय और जातीय संतुलन को साधने का पूरी कोशिश की गई है।

धामी कैबिनेट में गढ़वाल का पलड़ा भारी

उत्तराखंड में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। यूं तो चुनावों में तकरीबन एक साल का वक्त बचा है, लेकिन बीजेपी ने अपनी चुनावी तैयारियों को अभी से धार देना शुरू कर दिया है। हाल ही में धामी कैबिनेट विस्तार के बाद अब कैबिनेट में गढ़वाल से आने वाले मंत्रियों की संख्या अधिक हो गई है। ऐसे में माना जा रहा है कि बीजेपी गढ़वाल की विधानसभा सीटों पर अधिक सक्रियता से तैयारी करना चाहती है।

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गढ़वाल से आते हैं कैबिनेट के 8 मंत्री

धामी कैबिनेट में गढ़वाल से आने वाले मंत्रियों में सतपाल महाराज, सुबोध उनियाल, धन सिंह रावत, मदन कौशिक, प्रदीप बत्रा, खजान दास, गणेश जोशी और भरत चौधरी हैं। यानी मौजूदा दौर में धामी कैबिनेट में गढ़वाल का पलड़ा भारी है। ऐसे में जाहिर है कि बीजेपी चुनावी लिहाज से अपनी तैयारी शुरू कर चुकी है।

गढ़वाल के चुनावी समीकण पर डालें नजर

अब एक नजर गढ़वाल के चुनावी समीकण पर भी डाल लीजिए। उत्तराखंड विधानसभा की कुल 70 सीटों में से तकरीबन 40 सीटें गढ़वाल मंडल से ही आती हैं। यानी इस लिहाज से देखें तो सूबे की सरकार कौन चलाएगा ये गढ़वाल से ही तय हो जाता है। यही वजह है कि बीजेपी ने गढ़वाल को अहमियत दी है।

गढ़वाल के विधायकों पर BJP ने खेला अपना दांव

वहीं उत्तराखंड कांग्रेस के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की सक्रियता भी गढ़वाल में ही अधिक है। ऐसे में बीजेपी ने इसकी काट के लिए भी अपने गढ़वाल के विधायकों पर दांव खेला है। 2027 के चुनावों में क्या रिजल्ट आएगा ये तय जनता को करना है। हालांकि हालिया सियासी हलचलें बताती हैं कि चुनावी समर का अहम हिस्सा गढ़वाल में ही लड़ा जाएगा।

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