Anand Mahindra Post On Uttarakhand Phool Dei Festival: हमारे उत्तराखंड के खूसबसूरत त्यौहारों में से एक ने अब देश के दिग्गज लोगों का भी दिल जीतना शुरु कर दिया है। महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने सोशल मीडिया पर फूलदेई का वीडियो पोस्ट किया। जिसमें उन्होंने कुछ ऐसा लिखा जिसे सुनकर आपका सीना भी गर्व से चौड़ा हो जाएगा।
उत्तराखंड के इस त्यौहार के मुरीद हुए आनंद महिंद्रा Anand Mahindra Post On Uttarakhand Phool Dei Festival
हाल ही में पूरे उत्तराखंड में फूलदेई का त्यौहार मनाया गया। अगर आप उत्तराखंड से है तो आप जानते ही होंगे कि फूलदेई हमारे उत्तराखंड के पारंपरिक लोक पर्व में से एक है। ये बसंत ऋतु के स्वागत में मनाया जाता है। हाल ही में महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने भी उत्तराखंड के इस त्यौहार पर एक पोस्ट शेयर किया।
आनंद महिंद्रा ने फुलदेई पर पोस्ट किया शेयर
उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर फूलदेई का एक ऐसा ही वीडियो शेयर किया। साथ ही वो फूलदेई के इस त्यौहार की जमकर तारीफ भी करते नजर आए। आनंद महिंद्रा ने अपनी पोस्ट में लिखा की उन्होंने आज से पहले फूलदेई के बारे में सुना भी नहीं था। हालांकि, जब उन्होंने इसे देखा, तो उन्हें अमेरिका के हैलोवीन की याद आ गई।
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हैलोवीन से किया कम्पेयर
आनंद महिंद्रा ने आगे लिखा कि दोनों त्यौहारों में बच्चे घर घर जाते हैं लेकिन फर्क देखिए हैलोवीन में बच्चे कहते हैं ट्रिक ऑर ट्रीट यानी कुछ दो वरना शरारत करेंगे। वहीं फूलदेई में बच्चे कुछ मांगते नहीं बल्कि आशीर्वाद शुभकामनाएं और फूल देते हैं।भारत का फूलदेई हैलोवीन से भी अलग और प्यारा है।
बोले-‘इसे दुनिया तक पहुंचना चाहिए…’
आनंद महिंद्रा यहीं नहीं रुके। वो इस त्यौहार के पर्यावरण प्रेम से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने कहा कि जिस तरह होली ने पूरी दुनिया में अपना सफर तय किया है, आज दुनिया भर में लोग होली खेलते हैं, लिहाज़ा ‘फूलदेई’ को भी ग्लोबल होना चाहिए।

पहाड़ के बच्चे प्रकृति से जुड़ने का देते हैं खूबसूरत संदेश
बता दें कि आज के दौर में जब हम ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण बचाने की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, वहां हमारे पहाड़ के बच्चे प्रकृति से जुड़ने का सबसे खूबसूरत संदेश दे रहे हैं। उन्होंने इन बच्चों को अपना बताया और कहा कि दुनिया को इनसे सीखने की ज़रूरत है। हलांकि वहीं देखा जाए तो हम अपनी जड़ों से काफी दूर हो गए हैं। पहाड़ों से मैदानों में उतरकर हम अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं। आनंद महिंद्रा की ये पोस्ट एक रिमाइंडर है कि हमारी संस्कृति, हमारे पहाड़, और हमारे संस्कार दुनिया में सबसे अनमोल हैं।हमें इसे प्रिजर्व करके रखने की जरूरत है।
क्या होता है फूलदेई का त्यौहार?
इस दिन बच्चे जिन्हें फुलारी कहते हैं, सुबह सुबह रंग बिरंगे फूल तोड़कर लाते हैं। इस दिन फ्योली नाम के एक फूल को काफी खास माना जाता है। बच्चे टोकरे में इन फूलों को भरकर लोगों के घर-घर जाकर उनकी देहलीज पर फूल और चावल अर्पित करते हुए गाते हैं “फूल देई छम्मा देई दैणी द्वार भर भकार…” यानी आपके घर में सुख-समृद्धि बनी रहे।






