देहरादून। उत्तराखंड में आगामी चारधाम यात्रा 2026 से पहले धार्मिक व्यवस्थाओं को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। गंगोत्री धाम में गैर सनातनियों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी की जा रही है। इसके तहत श्री पांच गंगोत्री मंदिर समिति ने दर्शन से पहले ‘पंचगव्य’ ग्रहण को अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा है।
मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल के अनुसार, इस निर्णय के संवैधानिक और कानूनी पहलुओं की जांच के लिए एक समिति गठित की गई है, जिसमें विधि विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। यह समिति आगामी 10 दिनों में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्यवाही तय की जाएगी।
पंचगव्य ग्रहण से जुड़ा प्रवेश नियम
समिति के मुताबिक, गंगोत्री धाम में दर्शन से पहले पंचगव्य ग्रहण की व्यवस्था की जाएगी। जो व्यक्ति इसे स्वीकार करेगा, उसे सनातन परंपरा में आस्था रखने वाला माना जा सकता है। धार्मिक आधार पर इस व्यवस्था को लागू करने की बात कही जा रही है।
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क्या है पंचगव्य?
पंचगव्य संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ गाय से प्राप्त पांच तत्वों—दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर—का मिश्रण होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसे शुद्धिकरण और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। वैदिक परंपराओं में पूजा-पाठ, यज्ञ और संस्कारों में इसका विशेष महत्व बताया गया है।
‘घर वापसी’ का भी जिक्र
मंदिर समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि जो व्यक्ति पंचगव्य का आचमन करता है और गौ माता को पूजनीय मानता है, उसे सनातन परंपरा में शामिल माना जा सकता है। उन्होंने इसे अन्य समुदायों के लिए ‘घर वापसी’ का अवसर भी बताया।
अन्य धामों में भी चर्चा
इसी बीच बदरी-केदार मंदिर समिति ने भी केदारनाथ धाम और बदरीनाथ धाम में गैर हिंदुओं के प्रवेश को लेकर एफिडेविट व्यवस्था लागू करने पर विचार किया है।
वहीं यमुनोत्री धाम की मंदिर समिति ने भी इस विषय पर सहमति जताई है। समिति के अनुसार 24 मार्च को चैत्र शुक्ल षष्ठी (मां यमुना अवतरण दिवस) के अवसर पर इस संबंध में अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।
प्रशासनिक और कानूनी पहलू अहम
धार्मिक संगठनों के इन प्रस्तावों को लेकर अब सभी की नजर कानूनी और संवैधानिक पहलुओं पर टिकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के निर्णयों को लागू करने से पहले विस्तृत कानूनी समीक्षा आवश्यक होगी।






