Sonam Wangchuk Press Confrence: लद्दाख के मशहूर पर्यावरणविद सोनम वांगचुक ने जोधपुर सेंट्रल जेल से रिहाई मिल गई है। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस की। जिसमें वो काफी भावुक और स्पष्ट संदेश देते नजर आए। उन्होंने कहा कि उनकी व्यक्तिगत रिहाई जीत नहीं है। असल लड़ाई अभी भी लद्दाख और हिमालय के मुद्दों की है।
जेल से बाहर आए सोनम वानचुक!, की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस Sonam Wangchuk Press Confrence
इस दौरान वांगचुक ने अपनी टीम का धन्यवाद भी किया। उन्होंने कहा कि उनकी कानूनी टीम हर कदम उनके साथ रही। जिसके लिए वो उनके आभारी हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि हम एक दिन जरूर जीतेंगे। वो थोड़े से लालची इंसान है। वो केवल अपनी जीत नहीं चाहते। वो लद्दाख और हिमालय को भी जीतते हुए देखना चाहते है। जो अभी नहीं हुआ है।
जेल के दिनों को किया याद
जेल के दिनों को याद कर उन्होंने बताया कि 10 दिनों तक उन्हें उनके परिवार और वकीलों से नहीं संपर्क करवाया गया। जो कि उनके लिए काफी कठिन था। हालांकि उन्होंने इस अनुभव को संघर्ष का हिस्सा बताया।
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170 दिनों तक हिरासत में रहे वांगचुक
बताते चलें कि 170 दिनों तक वांगचुक जेल में रहे। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत की गई हिरासत को रद्द करने के बाद ही वो जेल से रिहा हुए है। वो लद्दाख की मांगों के लिए आंदोलन कर रहे थे। उनकी लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने और Sixth Schedule के तहत संवैधानिक संरक्षण देने की मांग को लेकर ही हिरासत में लिया गया था।
‘लड़ाई अभी भी जारी है…’ – वानचुक
वांगचुक ने इस बात को साफ किया ये कोई उनका व्यक्तिगत संघर्ष नहीं है। बल्कि लद्दाख के पर्यावरण, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा के लिए है। लड़ाई खत्म नहीं हुई है ये अभी जारी रहेगी।
क्या है मांगें?
लेह एपेक्स बॉडी (ABL) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) के नेतृत्व में लद्दाख में मेनली चार अहम मुद्दों के लिए प्रदर्शन हो रहा है।
- राज्य का दर्जा (Statehood)
- संविधान की छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा
- स्थानीय लोगों के लिए रोजगार में आरक्षण
- लेह-कारगिल के लिए अलग लोकसभा सीटें






